VPN यानि वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (Vitual Private Network). VPN एक ऐसी चीज़ है जो दुनिया भर में करोड़ों लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है. और हमें ऐसा लगता है कि शायद आने वाले समय में हर एक इंटरनेट यूज़र को VPN ज़रुरत पड़ने वाली है.

एक नेटवर्क से जुड़े इस डिजिटल वर्ल्ड में चीज़ें इतनी तेज़ी से बदल रही हैं कि हर एक चीज़ को समझ पाना सबके के लिए आसान नहीं है. हालाकि इंटरनेट ने बहुत सी चीज़ों को हमारे लिए आसान बना दिया है. लेकिन आसान सी दिखने वाले इस सिस्टम ने बहुत से लोगों के लिए मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं.

हम ऐसा इस लिए कह रहे हैं क्यूंकि अक्सर न्यूज़पेपर, इंटरनेट और न्यूज़ चैनल्स में डाटा लीक की ख़बरे आती रहती हैं और ये हालात दिन प्रतिदिन और भी खराब होते जा रहे हैं. गूगल से लेकर फेसबुक तक सभी के डाटा ऑनलाइन कहीं न कहीं लीक हो जाते हैं. ऐसे में अब ये महसूस होने लगा है कि इन बड़ी कंपनियों के लिए भी यूज़र्स के डाटा को सुरक्षित रख पाना अब मुस्किल हो गया है.

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रिसर्च से पता चलता है कि डाटा लीक के शिकार ऐसे यूज़र्स अधिक होते हैं जो पब्लिक वाई-फाई (अनसिक्योर्ड नेटवर्क) का इस्तेमाल करते हैं या रेगुलरली इन्टरनेट से बड़ी फाइल्स डाउनलोड करते हैं या वे यूज़र्स जो अब्रोड ट्रेवल करते रहते हैं. अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं तो VPN आपके लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.

VPN क्या होता है?

VPN एक ऐसा माध्यम है जिसकी मदद से हम इंटरनेट का इस्तेमाल प्राइवेट और सिक्योर तरीके से कर सकते हैं.

VPN Encryption

जब हम VPN का इस्तेमाल करते हैं तो हमारा कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफ़ोन VPN सर्विस प्रोवाइडर के सर्वर से कनेक्ट हो जाता है और यह हमारे डिवाइस और इंटरनेट के बीच एक वर्चुअल टनल क्रिएट कर देता है. जिससे होता ये है कि जब भी हम कोई वेबसाइट विजिट करते हैं तो उस वेबसाइट को लगता है कि ट्रैफिक VPN के सर्वर से आ रही है न कि हमारे डिवाइस से. इसीलिए हमारी पर्सनल आइडेंटिटी, लोकेशन और बाकी का सारा डाटा ISPs, मार्केटर्स, हैकर्स, सर्च इंजन्स की पकड़ में नहीं आता.

VPN कैसे काम करता है?

VPN किस तरह से काम करता है, इसे समझना ज्यादा मुस्किल नहीं अगर हम इसके काम करने के इन तीन तरीकों को अच्छे से समझ लेते हैं तो.

  • यह ओरिजिनल IP एड्रेस और लोकेशन को बदल देता है. जब हम VPN के सर्वर से कनेक्ट हो जाते हैं तो यह हमारे IP एड्रेस में फेरबदल कर देता है जिससे वेबसाइट्स को लगता है कि हम किसी दुसरे देश या किसी दुसरे द्वीप से सर्फिंग कर रहे हैं.
  • इंटरनेट ट्रैफिक को प्राइवेट टनल से गुजारता है. जब हम VPN नेटवर्क से कनेक्ट होते हैं तो हमारा सारा इंटरनेट ट्रैफिक और डाटा एक प्राइवेट टनल से होकर गुज़रता है. यह डाटा छोटे-छोटे पैकेट्स में होते हैं जिन्हें ट्रैक नहीं किया जा सकता.
  • पर्सनल डाटा को एन्क्रिप्ट कर देता है. VPN न सिर्फ हमारे डाटा को प्राइवेट टनल से गुजारता है बल्कि उन्हें एन्क्रिप्ट भी करता है. एन्क्रिप्टेड डाटा को काफी सुरक्षित माना जाता है और इसे हैक करना भी लगभग नामुमकिन होता है.

VPN इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं?

VPN के और क्या फायदे हैं या हमें VPN का उपयोग क्यूँ करना चाहिए?

1. सिक्यूरिटी
VPN, Security

यह यूज़र्स को एक बेहतर सिक्यूरिटी प्रोवाइड कराता है जिससे हैकर्स के लिए इंटरनेट यूज़र्स का लॉग इन डिटेल, क्रेडिट या डेबिट कार्ड डिटेल, और बैंकिंग इनफार्मेशन जैसी जानकारी को चुरा पाना मुस्किल हो जाता है. इतना ही नहीं VPN का एडवांस सिक्यूरिटी टनल आपकी ऑनलाइन एक्टिविटीज को ट्रैक करने से भी रोकता है. भले ही आप सिक्योर नेटवर्क से कनेक्टेड हों या नहीं.

2. प्राइवेसी

VPN, Privacy

ऑनलाइन हो रहे डाटा लीक ने दुनिया भर में करोड़ों इंटरनेट यूज़र्स की चिंताएं बढ़ा दी है. इसलिए VPN का इस्तेमाल करना ज़रुरत के साथ-साथ अब बजबूरी भी बन गयी है. जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की VPN किस प्रकार से हमारे पर्सनल डाटा को एक से दुसरे जगह पर भेजने से पहले एन्क्रिप्ट करता है.

VPN द्वारा एन्क्रिप्टेड डाटा को हैकर्स, ISPs और सरकार द्वारा भी ट्रैक कर पाना बेहद मुस्किल हो जाता है. हलाकि फिर भी सरकार अगर चाहे तो हमारी इंटरनेट एक्टिविटीज को एक्सेस कर सकती है.

3. फ्रीडम

VPN, Freedon to access

VPN की मदद से रिस्ट्रिक्टेड कंटेंट, ब्लैकलिस्टेड साइट्स और ब्लॉक्ड सर्विसेज को भी एक्सेस किया जा सकता है. कई देशों में कुछ अवैध वेबसाइट्स और सर्विसेज को बैन कर दिया जाता है. जिन्हें बिना वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क की मदद से नहीं एक्सेस किया जा सकता.

नोट: जिन वेबसाइट्स को सरकार द्वारा बैन किया जाता है उन्हीं साइट्स से फ्रॉड, डाटा लीक या हैक होने का खतरा ज्यादा होता है. हमारा सुझाव यही है कि जो साइट्स बैन हैं उन्हें एक्सेस करने की कोशिश न करें.

VPN का इस्तेमाल कब करना चाहिए?

अगर आप अपने पर्सनल डाटा को सिक्योर रखना चाहते हैं तो जब भी आप किसी पब्लिक वाई-फाई, ऑफिस नेटवर्क, होटल वाई-फाई, रेल-वायर या किसी अनसिक्योर्ड नेटवर्क से कनेक्टेड हों तो VPN का इस्तेमाल ज़रूर करें खासकर तब जब आप कोई ट्रांजेक्शन कर रहे हों.

एंड्राइड, iOS, MacOS या विंडोज — सभी ऑपरेटिंग सिस्टम्स के लिए फ्री और पेड VPN एप्स, एक्सटेंशन (वेब ब्राउसर के लिए) और सॉफ्टवेर उपलब्ध हैं. आप इन ऑपरेटिंग सिस्टम्स के स्टोर में जाकर अपनी पसंद का VPN इनस्टॉल कर इस्तेमाल कर सकते हैं.

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