क्या आप भी मानते हैं कि कुछ लोग अपने जन्म से ही जीनियस होते हैं. या फिर बाद में एक जीनियस बन जाते हैं? क्या हम अपने दिमाग को समझ कर इसकी क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं?

विज्ञानिक ऐसा मानते थे कि हम जिस दिमाग के साथ पैदा हुए हैं, उसमें ज़्यादा कुछ बदलाव नहीं किया जा सकता. लेकिन न्यूरोप्लास्टीसिटी ने इस अवधारणा को बदल के रख दिया.

Neuroplasticity: The brain’s ability to reorganize itself by forming new neural connections throughout life. Neuroplasticity allows the neurons in the brain to compensate for injury and disease and to adjust their activities in response to new situations or to changes in their environment.

Source: Medicinenet
Meditation

तो चलिए अब जानते हैं उन 10 बातों के बारे में जो दिमाग कि शक्तियों या क्षमताओं को समझने में हमारी मदद कर सकती हैं.

1. दिमाग की प्रोग्रामिंग को समझें

हमें यह समझने कि ज़रुरत है कि दिमाग कैसे काम करता है, ताकि हम दिमाग से काम ले सकें.

एक मशीन की तरह ही हमारा दिमाग भी एक निश्चित तरीके से काम करने के लिए कुदरती प्रोग्राम किया गया है. जब तक हम इसके प्रोग्रामिंग को नहीं समझ लेते, हम इसका बेहतर इस्तेमाल नहीं कर सकते.

2. दिमाग भी एक मांसपेशी है

सिर्फ मेंटली इंटेलीजेंट ही नहीं, मेंटली फिट होना भी है ज़रूरी.

सक्सेस के बारे में कई लोगों का ये मानना है कि कुछ इसे पाने कि क्षमता के साथ ही पैदा होते हैं. जो हर किसी के नसीब में नहीं होती है.

लेकिन सच्चाई ये है कि हमारा दिमाग भी एक मांसपेशी की तरह ही होता है जिसे हम हाइड्रेशन, न्यूट्रीशन और एक्सरसाइज से बेहतर बना सकते हैं. अगर आप भी चाहते हैं कि आपका ब्रेन हमेशा फिट रहे तो आपको हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहना होगा.

3. हम सभी में एक जीनियस है

ये मायने नहीं रखता कि आप कितने स्मार्ट हैं, बल्कि मायने ये रखता है कि आप स्मार्ट कैसे हैं?

ये बहुत दुःख कि बात है कि हम में से ज़्यादातर लोगों का यही मानना है कि जो लोग पढ़ने-लिखने में कमज़ोर हैं या फिर जो चीज़ों को जल्दी सीख या समझ नहीं पाते वो मानसिक रूप से ठीक नहीं हैं.

अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, “हर कोई जीनियस है. लेकिन अगर आप एक मछली को पेड़ पर चढ़ने कि क्षमता से आकेंगे, तो वह जीवन भर यही समझती रहेगी कि वह बेवकूफ है.”

मतलब साफ़ है कि हम सभी की एक खासियत होती है जिसे हमें पहचानने कि ज़रुरत है. क्यूंकि एक जीनियस आपके अन्दर भी है.

4. अपनी धारणाओं को बदलिए

हम किस तरह से व्यवहार करते हैं, यह हमारी धारणाओं पर ही निर्भर करता है.

हमारे दिमाग में लगभग 70,000 थॉट्स हर दिन आते हैं. और यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन 70,000 थॉट्स को पॉजिटिव तरीके से एक्सेप्ट करते हैं या फिर पुरानी धारणाओं तक ही सिमित रहते हैं.

कहने का मतलब ये है कि हम अपने दिमाग की प्रोग्रामिंग में जैसे कोड इंटर करेंगे, हमें आउटपुट भी उसी के अनुसार ही मिलेगा. तो क्यूँ न कुछ पॉजिटिव और बेहतर कोड्स दिमाग तक भेजा जाए?

5. दूसरों की भी राय लें

बेहतर वही बन पाता है जो फीडबैक लेकर आवश्यतानुसार बदलाब लाता है.

फीडबैक ही एक ऐसा तरीका है जिससे हम समझ सकते हैं कि रियल वर्ल्ड में हमारे लिए क्या मददगार साबित हो सकता है.

कभी-कभी नेगेटिव फीडबैक को लोग पर्सनली ले लेते हैं और निराश होकर बैठ जाते हैं. लेकिन हम ऐसा मानते हैं की नेगेटिव फीडबैक हमारे लिए नए मौके लेकर आता है और हमें कुछ नया सीखने और कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता है.

6. हम हमेशा कुछ बेहतर कर सकते हैं

इस बात को अपने मन में बैठा लीजिये कि जो आप सोच सकते हैं, वो आप कर भी सकते हैं.

अगर आप ये मान लें कि आप किसी काम को नहीं कर सकते हैं तो सच मानिये आप उसे कभी नहीं कर पायेंगे. क्यूँकि दिमाग की संरचना ऐसी है कि जो कुछ भी हम सोचते हैं ये उसे ही सच मानने लगता है.

यदि आप बेहतर बनना चाहते हैं तो सबसे पहले अच्छी सोच को अपने दिमाग में जगह देनी होगी.

7. सीखने के सही तरीके को समझें

अगर आप सच में कुछ सीखना चाहते हैं, तो फिजिकली और मेंटली एक्टिव बने रहिये.

किसी भी वस्तु, स्थान या व्यक्ति के बारे में पढ़कर या सुनकर आप उतना नहीं जान सकते जितना कि उस स्थान पर जाकर या उस व्यक्ति से मिलकर जान पायेंगे. जब हम पर्सनली किसी जगह पर जाते हैं या किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो वह अनुभव एक लम्बे समय तक याद रहता है.

8. क्रिएटिव बनने की कोशिश करें

मस्तिष्क चीज़ों को उपभोग करने से नहीं बल्कि चीज़ों को क्रिएट करने से ज़्यादा सीखता है.

सक्रीय रहने और जल्दी सीखने के लिए क्रिएटिव बनना बेहद ज़रूरी है. अगर हम बस वस्तुओं को उपभोग (कंसम्पशन) करने की आदत डाल लेंगे तो हमारे सीखने और कुछ नया करने कि रफ़्तार धीमी हो जायेगी.

9. एक्टिव रहने की कोशिश करें

आप जितना ज़्यादा एक्टिव रहेंगे, आपका दिमाग आपसे उतना ही ज़्यादा खुश रहेगा.

दिमाग को एक्टिविटीज बेहद पसंद है. एक्टिव रहने के लिए एक्सरसाइज से बेहतर कुछ नहीं. क्यूंकि रेगुलर एक्सरसाइज करने से हमारी मेमोरी, थिंकिंग स्किल और फोकस करने की क्षमता बढती है.

तो इतना एक्टिव रहना क्यूँ ज़रूरी है? दरअसल, दिमाग को ठीक से काम करने के लिए ज़्यादा ऑक्सीजन कि ज़रुरत होती है. और एक्सरसाइज हमारे दिमाग तक ज़्यादा ऑक्सीजन पहुँचाने में हमारी मदद करता है.

10. प्रैक्टिस, प्रैक्टिस और प्रैक्टिस

हम प्राइवेट में जितना प्रैक्टिस करते हैं, पब्लिक में हमें उतना ही रिवॉर्ड मिलता है.

अगर आप भी एक जीनियस बनना चाहते हैं, और चाहते हैं कि आपकी लाइफ भी सक्सेसफुल हो, तो आपको भी एक जीनियस की तरह प्रैक्टिस करते रहना होगा.

जब भी मौका मिले, जब भी आप अकेले हों, तब आप अपने उस हुनर की प्रैक्टिस ज़रूर करें जिसके लिए दुनिया में अपनी एक पहचान बनाना चाहते हैं.

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