I am not a product of my circumstances. I am a product of my decisions.

स्टीफन कोवी के द्वारा कही गयी इस लाइन का मतलब है कि ‘मैं अपने परिस्थितियों कि उपज नहीं हूँ। मैं अपने निर्णयों कि उपज हूँ।’ बेशक इस लाइन का शाब्दिक अर्थ ये नहीं है लेकिन कहने का मतलब यही है।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में पाया गया था कि हम एक दिन में 70 से भी ज्यादा डिसिशन लेते हैं जिनमे से कुछ डिसिशन लेना बहुत आसन होता हैं जैसे – क्या खाना है, क्या पहनना है या कहाँ जाना है। जबकि कुछ डिसिशन लेना हमारे लिए बहुत मुस्किल होता है। जैसे – न्यू स्मार्टफ़ोन लेना, किसी के लिए एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होना, बिना बैकउप प्लान के जॉब छोड़ देना, इत्यादि।

ज़िन्दगी में अक्सर हम ऐसे डिसिशन ले लेते हैं जिनकी वजह से हमें हमेशा पछताना पड़ता है। मैं उम्मीद करता हूँ इन्हें पढ़ने के बाद आप ऐसे डिसिशन लेने से बच सकेंगे।

1. दुसरे लोग की सोच को आधार बना कर अपनी लाइफ के फैसले मत लीजिये

इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि लोगों की राय को बस एक राय की ही तरह समझे। हर चीज़ के लिए आपकी अपनी भी कुछ राय होनी चाहिए भले ही वो दूसरों की नज़र में कितना ही बुरा क्यूँ न हो। अपनी ज़िन्दगी के फैसले आप अपने अनुसार कीजिये।

2. हद से ज्यादा अपने काम को एहमियत मत दीजिये

दुनिया में अपनी पहचान बनाने और आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत करना ज़रूरी है लेकिन जब हम अपनों को भूल कर बस इसी में लग जाते हैं तो ये एक समस्या बन जाती है। हम अक्सर उनके लिए ढेर सारा पैसा कमाना चाहते हैं जिन्हें हम प्यार करते हैं और हमें ये एहसास नहीं होता कि उन्हें पैसों से ज्यादा हमारे साथ की ज़रुरत होती है।

3. अपनी भावनाओं को छुपाने की आदत मत डालिए

कुछ लोग मानते हैं कि भावनाओं को व्यक्त करना खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए इसे दबा के रखना चाहिए। बेहतर यही है कि हम अपनी इक्षाओं को व्यक्त करना सीखें। उदाहरण के लिए अगर आपको लगता है कि आपको अपनी जॉब में आपके मेहनत के हिसाब से पैसा नहीं मिल रहा तो अपने बॉस से बात कीजिये कि आप उससे ज्यादा के हकदार हैं। क्या पता शायद आपको सफलता मिल ही जाए लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो शायद आपको पछताना पड़ सकता है।

4. दोस्तों का साथ कभी छूटने मत दीजिये

अक्सर लोगों को दोस्तों का ख्याल नहीं आता जब वो पानी लाइफ और करियर को बनाने में व्यस्त हो जाते हैं। खासकर पुराने दोस्तों को। मैं इसे दुर्भाग्य ही कहूँगा क्यूंकि तनाव और स्ट्रेस को दूर करने के लिए दोस्तों के साथ समय बिताने से अच्छा और कुछ भी नहीं। जो ख़ुशी सच्चे दोस्तों के साथ मिलती है शायद वो ख़ुशी कहीं और नहीं मिलती।

5. खुद को खुश और संतुष्ट रखने का प्रयास कीजिये

एक ज़िम्मेदार व्यक्ति होने के नाते हो सकता है कि आप दूसरों की ख़ुशी को ज्यादा महत्त्व देते होंगे पर मैं ये मानता हूँ कि अगर हम खुश नहीं हैं तो हम किसी को भी खुश नहीं रख रकते। परेशानियां तो हम सभी की ज़िन्दगी में होती हैं, लेकिन आप उन परेशानियों को किस नज़रिए से देखते हैं यही अधिक महत्त्व रखता है। कहते हैं खुश रहना एक विकल्प है इसलिए आप भी खुश रहना चुन सकते हैं।

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